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Shiv Shankar from

Shiv Shankar

Qulfication B.Sc,B.Pharma

DoB-12/09/1988

Father's Name: Prem Shankar (ret. Railway)
Mother Name Godhan Devi ( house wife)

Elder brother Dr.BP (lac.)

Younger brother Rk ( Railway) unmarried

Elder sister Heera Devi

Younger sister suman Kumari

Contact: 8923086208, 8057400339

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संत गाडगे बाबा की जीवनी – Sant Gadge Baba Biography in Hindi

पूरा नाम –  देवीदास डेबुजी झिंगराजि जानोरकर (Sant Gadge Baba) जन्म      –  23 फरवरी, 1876 जन्मस्थान –  अँजनगाँव सुरजी, जिला. अमरावती, महाराष्ट्र पिता      –  झिंगराजि माता      –  सखुबाई संत गाडगे बाबा की जीवनी – Sant Gadge Baba Biography in Hindi डेबुजी झिंगराजि जानोरकर साधारणतः संत गाडगे महाराज और गाडगे बाबा के नाम से जाने जाते थे। वे एक समाज सुधारक और घुमक्कड भिक्षुक थे जो महाराष्ट्र में सामाजिक विकास करने हेतु साप्ताहिक उत्सव का आयोजन करते थे। उन्होंने उस समय भारतीय ग्रामीण भागो का काफी सुधार किया और आज भी उनके कार्यो से कई राजनैतिक दल और सामाजिक संस्थान प्रेरणा ले रहे है। Loading... जीवन: उनका वास्तविक नाम देवीदास डेबुजी था। महाराज का जन्म महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अँजनगाँव सुरजी तालुका के शेड्गाओ ग्राम में एक धोबी परिवार में हुआ था। गाडगे महाराज एक घूमते फिरते सामाजिक शिक्षक थे। वे पैरो में फटी हुई चप्पल और सिर पर मिट्टी का कटोरा ढककर पैदल ही यात्रा किया करते थे। और यही उनकी पहचान थी...

गाडगे महाराज जीवनी - Biography of Gadge Maharaj

डेबुजी झिंगराजि जानोरकर साधारणतः संत गाडगे महाराज और गाडगे बाबा के नाम से जाने जाते थे, वे एक समाज सुधारक और घुमक्कड भिक्षुक थे जो महाराष्ट्र में सामाजिक विकास करने हेतु साप्ताहिक उत्सव का आयोजन करते थे. उन्होंने उस समय भारतीय ग्रामीण भागो का काफी सुधार किया और आज भी उनके कार्यो से कई राजनैतिक दल और सामाजिक संस्थान प्रेरणा ले रहे है. प्रारंभिक जीवन: उनका वास्तविक नाम देवीदास डेबुजी था. महाराज का जन्म महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अँजनगाँव सुरजी तालुका के शेड्गाओ ग्राम में एक धोबी परिवार में हुआ था. वे एक घूमते फिरते सामाजिक शिक्षक थे, वे पैरो में फटी हुई चप्पल और सिर पर मिट्टी का कटोरा ढककर पैदल ही यात्रा किया करते थे. और यही उनकी पहचान थी. जब वे किसी गाँव में प्रवेश करते थे तो वे तुरंत ही गटर और रास्तो को साफ़ करने लगते. और काम खत्म होने के बाद वे खुद लोगो को गाँव के साफ़ होने की बधाई भी देते थे. गाँव के लोग उन्हें पैसे भी देते थे और बाबाजी उन पैसो का उपयोग सामाजिक विकास और समाज का शारीरिक विकास करने में लगाते. लोगो से मिले हुए पैसो से महाराज गाँवो में स्कूल, धर्मशाला, अस्पताल...

Deepa Kumari from Muzaffarpur, Bihar